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mahabharat 1.90.24: अग्निहोत्र, मौन, स्वाध्याय और यज्ञ - ये चार कर्म मनुष्य को भय से मुक्त करते हैं; किन्तु यदि इन्हें ठीक प्रकार से न किया जाए और अहंकारपूर्वक किया जाए, तो ये भय को ही जन्म देते हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.90: अष्टक और ययातिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 90: अष्टक और ययातिका संवाद  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.90.24 
चत्वारि कर्माण्यभयंकराणि
भयं प्रयच्छन्त्ययथाकृतानि।
मानाग्निहोत्रमुत मानमौनं
मानेनाधीतमुत मानयज्ञ:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अग्निहोत्र, मौन, स्वाध्याय और यज्ञ - ये चार कर्म मनुष्य को भय से मुक्त करते हैं; किन्तु यदि इन्हें ठीक प्रकार से न किया जाए और अहंकारपूर्वक किया जाए, तो ये भय को ही जन्म देते हैं।
 
Agnihotra, silence, study and sacrifice - these four acts liberate a man from fear; but if they are not performed properly and if they are performed with arrogance, they instead give rise to fear. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)