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mahabharat 1.90.22: ययाति बोले - राजन! ऋषिगण स्वर्ग के सात महान द्वार बताते हैं, जिनसे होकर प्राणी उसमें प्रवेश करते हैं। उनके नाम हैं - तप, दान, शम, दम, लज्जा, सरलता और सभी प्राणियों पर दया। जब मनुष्य अभिमान से आवृत हो जाता है, तब वे तप आदि द्वार सदैव नष्ट हो जाते हैं, ऐसा ऋषियों का कथन है।   |   mahabharat अध्याय 1.90: अष्टक और ययातिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 90: अष्टक और ययातिका संवाद  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.90.22 
ययातिरुवाच
तपश्च दानं च शमो दमश्च
ह्रीरार्जवं सर्वभूतानुकम्पा।
स्वर्गस्य लोकस्य वदन्ति सन्तो
द्वाराणि सप्तैव महान्ति पुंसाम्।
नश्यन्ति मानेन तमोऽभिभूता:
पुंस: सदैवेति वदन्ति सन्त:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले - राजन! ऋषिगण स्वर्ग के सात महान द्वार बताते हैं, जिनसे होकर प्राणी उसमें प्रवेश करते हैं। उनके नाम हैं - तप, दान, शम, दम, लज्जा, सरलता और सभी प्राणियों पर दया। जब मनुष्य अभिमान से आवृत हो जाता है, तब वे तप आदि द्वार सदैव नष्ट हो जाते हैं, ऐसा ऋषियों का कथन है।
 
Yayati said – King! Sages tell about seven great doors of heaven through which living beings enter it. Their names are - Tapa, Daan, Sham, Dum, Lajja, Simplicity and kindness towards all living beings. Those doors of austerity etc. always get destroyed when a man is covered with pride, this is the saying of the saints. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)