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श्लोक 1.90.21  |
अष्टक उवाच
किंस्वित् कृत्वा लभते तात लोकान्
मर्त्य: श्रेष्ठांस्तपसा विद्यया वा।
तन्मे पृष्ट: शंस सर्वं यथाव-
च्छुभाँल्लोकान् येन गच्छेत् क्रमेण॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| अष्टक ने पूछा - पिताजी ! मनुष्य किन कर्मों से उत्तम लोकों को प्राप्त करता है ? क्या वे लोक तप से प्राप्त होते हैं या ज्ञान से ? मैं यही पूछ रहा हूँ । मुझे विस्तारपूर्वक बताइए कि किन कर्मों से क्रमशः उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है ॥ 21॥ |
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| Ashtak asked - Father! By what deeds does a man attain the best world? Are those worlds attained by penance or by knowledge? This is what I am asking. Tell me in detail the deeds by which one can attain the best worlds one after the other. ॥ 21॥ |
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