Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.90.16: नाक से सुगंध लेता है। जीभ से रस का स्वाद लेता है। त्वचा से स्पर्श का और मन से आंतरिक भावनाओं का अनुभव करता है। सप्तक! इस प्रकार आत्मा महान जीवों के शरीर में स्थापित होती है। 16॥ | mahabharat अध्याय 1.90: अष्टक और ययातिका संवाद । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
घ्राणेन गन्धं जिह्वयाथो रसं च
त्वचा स्पर्शं मनसा वेद भावम्।
इत्यष्टकेहोपहितं हि विद्धि
महात्मनां प्राणभृतां शरीरे॥ १६॥
अनुवाद
नाक से सुगंध लेता है। जीभ से रस का स्वाद लेता है। त्वचा से स्पर्श का और मन से आंतरिक भावनाओं का अनुभव करता है। सप्तक! इस प्रकार आत्मा महान जीवों के शरीर में स्थापित होती है। 16॥
Takes fragrance through nose. Tastes juice through the tongue. Experiences touch through skin and internal feelings through mind. Octave! In this way the soul is established in the body of great living beings. 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥