Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.90.15: जब भ्रूण बड़ा होकर सब अंगों से युक्त हो जाता है, तब वह चेतना का आश्रय लेकर योनि से बाहर आ जाता है और मनुष्य कहलाता है। वह कानों से शब्द सुनता है और आँखों से रूपों को देखता है॥15॥ | mahabharat अध्याय 1.90: अष्टक और ययातिका संवाद । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स जायमानो विगृहीतमात्र:
संज्ञामधिष्ठाय ततो मनुष्य:।
स श्रोत्राभ्यां वेदयतीह शब्दं
स वै रूपं पश्यति चक्षुषा च॥ १५॥
अनुवाद
जब भ्रूण बड़ा होकर सब अंगों से युक्त हो जाता है, तब वह चेतना का आश्रय लेकर योनि से बाहर आ जाता है और मनुष्य कहलाता है। वह कानों से शब्द सुनता है और आँखों से रूपों को देखता है॥15॥
When the embryo grows and is complete with all the organs, then it takes shelter of consciousness and comes out of the vagina and is called a human being. He hears sounds with his ears and sees forms with his eyes.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥