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mahabharat 1.90.11: जीव जल से गिरकर वनस्पतियों और औषधियों में प्रवेश करते हैं। जल, वायु, पृथ्वी और आकाश आदि में प्रवेश करके वे अपने कर्मानुसार पशु या मनुष्य बनते हैं। इस प्रकार पृथ्वी पर आकर वे पुनः उपर्युक्त क्रम से गर्भ की गति को प्राप्त होते हैं। ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.90: अष्टक और ययातिका संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 90: अष्टक और ययातिका संवाद  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.90.11 
वनस्पतीनोषधीश्चाविशन्ति
अपो वायुं पृथिवीं चान्तरिक्षम्।
चतुष्पदं द्विपदं चापि सर्व-
मेवम्भूता गर्भभूता भवन्ति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जीव जल से गिरकर वनस्पतियों और औषधियों में प्रवेश करते हैं। जल, वायु, पृथ्वी और आकाश आदि में प्रवेश करके वे अपने कर्मानुसार पशु या मनुष्य बनते हैं। इस प्रकार पृथ्वी पर आकर वे पुनः उपर्युक्त क्रम से गर्भ की गति को प्राप्त होते हैं। ॥11॥
 
The living beings fall from water and enter plants and medicines. Entering water, air, earth and space etc., they become animals or humans as per their karma. In this way, after coming to the earth, they again attain the state of womb as per the above mentioned order. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)