Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.90.10: ययाति बोले - आकाश से जो जीव गिरता है, वह अस्र (जल) बन जाता है। फिर धीरे-धीरे वह नए शरीर का बीजरूपी वीर्य बन जाता है। वह वीर्य, पुष्प और फल रूपी शेष कर्मों के साथ मिलकर उपयुक्त योनि में जाता है। जब गर्भाधान हेतु प्रयत्नशील पुरुष किसी स्त्री के साथ समागम करता है, तो वीर्य में स्थित जीव, स्त्री के रजस्वला रक्त के साथ मिल जाता है। तत्पश्चात् वह गर्भ में परिणत हो जाता है।॥10॥ | mahabharat अध्याय 1.90: अष्टक और ययातिका संवाद । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ययातिरुवाच
अस्रं रेत: पुष्पफलानुपृक्त-
मन्वेति तद् वै पुरुषेण सृष्टम्।
स वै तस्या रज आपद्यते वै
स गर्भभूत: समुपैति तत्र॥ १०॥
अनुवाद
ययाति बोले - आकाश से जो जीव गिरता है, वह अस्र (जल) बन जाता है। फिर धीरे-धीरे वह नए शरीर का बीजरूपी वीर्य बन जाता है। वह वीर्य, पुष्प और फल रूपी शेष कर्मों के साथ मिलकर उपयुक्त योनि में जाता है। जब गर्भाधान हेतु प्रयत्नशील पुरुष किसी स्त्री के साथ समागम करता है, तो वीर्य में स्थित जीव, स्त्री के रजस्वला रक्त के साथ मिल जाता है। तत्पश्चात् वह गर्भ में परिणत हो जाता है।॥10॥
Yayati said - The creature that falls from the sky becomes Asr (water). Then it gradually becomes the seed-like semen of the new body. That semen, combined with the remaining karmas in the form of flower and fruit, follows the appropriate vagina. When the man who is trying to conceive has intercourse with a woman, the living being contained in the semen mixes with the woman's menstrual blood. Thereafter, it transforms into a fetus.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥