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mahabharat 1.9.d1: 'यदि पापरूपी राक्षसों का नाश करने वाले, इन्द्रियों के स्वामी, जगदीश्वर और सर्वव्यापी भगवान श्रीकृष्ण में मेरी अटूट भक्ति हो, तो यह कल्याणी प्रमद्वारा उत्पन्न हो जाएगी।'   |   mahabharat अध्याय 1.9: रुरुकी आधी आयुसे प्रमद्वराका जीवित होना, रुरुके साथ उसका विवाह, रुरुका सर्पोंको मारनेका निश्चय तथा रुरु-डुण्डुभ-संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 9: रुरुकी आधी आयुसे प्रमद्वराका जीवित होना, रुरुके साथ उसका विवाह, रुरुका सर्पोंको मारनेका निश्चय तथा रुरु-डुण्डुभ-संवाद  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  1.9.d1 
(कृष्णे विष्णौ हृषीकेशे लोकेशेऽसुरविद्विषि।
यदि मे निश्चला भक्तिर्मम जीवतु सा प्रिया॥ )
 
 
अनुवाद
'यदि पापरूपी राक्षसों का नाश करने वाले, इन्द्रियों के स्वामी, जगदीश्वर और सर्वव्यापी भगवान श्रीकृष्ण में मेरी अटूट भक्ति हो, तो यह कल्याणी प्रमद्वारा उत्पन्न हो जाएगी।'
 
'If I have unwavering devotion towards the destroyer of sinful demons, the lord of the senses, Jagdishwar and the omnipresent Lord Shri Krishna, then this Kalyani Pramadvara will arise.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)