Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.9.7-8: देवदूत ने कहा, "हे पुण्यात्मा रुरु! आप शोक से व्याकुल हैं। आप जो कुछ कह रहे हैं, वह व्यर्थ है; क्योंकि जिस मनुष्य की आयु समाप्त हो जाती है, उसे दूसरा जीवन नहीं मिल सकता। यह बेचारी प्रमद्वरा गन्धर्व और अप्सरा की पुत्री थी। इसकी आयु समाप्त हो गई है। अतः हे पुत्र! तुम अपने मन को किसी भी प्रकार से दुखी मत करो।" 7-8 | mahabharat अध्याय 1.9: रुरुकी आधी आयुसे प्रमद्वराका जीवित होना, रुरुके साथ उसका विवाह, रुरुका सर्पोंको मारनेका निश्चय तथा रुरु-डुण्डुभ-संवाद । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवदूत ने कहा, "हे पुण्यात्मा रुरु! आप शोक से व्याकुल हैं। आप जो कुछ कह रहे हैं, वह व्यर्थ है; क्योंकि जिस मनुष्य की आयु समाप्त हो जाती है, उसे दूसरा जीवन नहीं मिल सकता। यह बेचारी प्रमद्वरा गन्धर्व और अप्सरा की पुत्री थी। इसकी आयु समाप्त हो गई है। अतः हे पुत्र! तुम अपने मन को किसी भी प्रकार से दुखी मत करो।" 7-8
The angel said, "O virtuous Ruru! You are distraught with grief. Whatever you are saying is futile; because a man whose lifespan has ended cannot get another life. This poor lady Pramadvara was the daughter of a Gandharva and an Apsara. The lifespan she had got has ended. Therefore, dear son, do not let your mind be sad in any way." 7-8
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥