Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.9.5: यदि मैंने जन्म से ही अपने मन और इन्द्रियों को वश में किया होता और ब्रह्मचर्य व्रत का कठोरता से पालन किया होता, तो मेरी प्रिय प्रमद्वारा अभी जीवित हो जाती। ॥5॥ | mahabharat अध्याय 1.9: रुरुकी आधी आयुसे प्रमद्वराका जीवित होना, रुरुके साथ उसका विवाह, रुरुका सर्पोंको मारनेका निश्चय तथा रुरु-डुण्डुभ-संवाद । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा च जन्मप्रभृति यतात्माहं धृतव्रत:।
प्रमद्वरा तथा ह्येषा समुत्तिष्ठतु भामिनी॥ ५॥
अनुवाद
यदि मैंने जन्म से ही अपने मन और इन्द्रियों को वश में किया होता और ब्रह्मचर्य व्रत का कठोरता से पालन किया होता, तो मेरी प्रिय प्रमद्वारा अभी जीवित हो जाती। ॥5॥
'If I have controlled my mind and senses since my birth and have strictly observed the vows of celibacy, then my beloved Pramdwara would come back to life right now.' ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥