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mahabharat 1.9.21: एक दिन ब्राह्मण रुरु एक विशाल वन में गया, जहाँ उसने द्रोणाचार्य प्रजाति का एक वृद्ध सर्प सोया हुआ देखा।   |   mahabharat अध्याय 1.9: रुरुकी आधी आयुसे प्रमद्वराका जीवित होना, रुरुके साथ उसका विवाह, रुरुका सर्पोंको मारनेका निश्चय तथा रुरु-डुण्डुभ-संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 9: रुरुकी आधी आयुसे प्रमद्वराका जीवित होना, रुरुके साथ उसका विवाह, रुरुका सर्पोंको मारनेका निश्चय तथा रुरु-डुण्डुभ-संवाद  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.9.21 
स कदाचिद् वनं विप्रो रुरुरभ्यागमन्महत्।
शयानं तत्र चापश्यद् डुण्डुभं वयसान्वितम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
एक दिन ब्राह्मण रुरु एक विशाल वन में गया, जहाँ उसने द्रोणाचार्य प्रजाति का एक वृद्ध सर्प सोया हुआ देखा।
 
One day, the Brahmin Ruru went to a large forest. There he saw an old snake of the Dronacharya species sleeping. 21.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)