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mahabharat 1.9.20: साँपों को देखकर वह बहुत क्रोधित हो जाता और हाथ में एक छड़ी लेकर अपनी पूरी क्षमता से उन पर हमला कर देता।   |   mahabharat अध्याय 1.9: रुरुकी आधी आयुसे प्रमद्वराका जीवित होना, रुरुके साथ उसका विवाह, रुरुका सर्पोंको मारनेका निश्चय तथा रुरु-डुण्डुभ-संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 9: रुरुकी आधी आयुसे प्रमद्वराका जीवित होना, रुरुके साथ उसका विवाह, रुरुका सर्पोंको मारनेका निश्चय तथा रुरु-डुण्डुभ-संवाद  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.9.20 
स दृष्ट्वा जिह्मगान् सर्वांस्तीव्रकोपसमन्वित:।
अभिहन्ति यथासत्त्वं गृह्य प्रहरणं सदा॥ २०॥
 
 
अनुवाद
साँपों को देखकर वह बहुत क्रोधित हो जाता और हाथ में एक छड़ी लेकर अपनी पूरी क्षमता से उन पर हमला कर देता।
 
On seeing the snakes he would become very angry and taking a stick in his hand he would attack them to the best of his ability.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)