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mahabharat 1.9.17-18: महातेजस्वी रुरु के भाग्य में भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनकी आयु बहुत बढ़ गई थी। जब उन्होंने अपनी पत्नी के लिए अपना आधा जीवन समर्पित कर दिया, तब दोनों के पिताओं ने प्रसन्नतापूर्वक निश्चित तिथि पर उनका विवाह कर दिया। दोनों दम्पति एक-दूसरे के शुभचिंतक बन गए और सुखपूर्वक रहने लगे। 17-18।   |   mahabharat अध्याय 1.9: रुरुकी आधी आयुसे प्रमद्वराका जीवित होना, रुरुके साथ उसका विवाह, रुरुका सर्पोंको मारनेका निश्चय तथा रुरु-डुण्डुभ-संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 9: रुरुकी आधी आयुसे प्रमद्वराका जीवित होना, रुरुके साथ उसका विवाह, रुरुका सर्पोंको मारनेका निश्चय तथा रुरु-डुण्डुभ-संवाद  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  1.9.17-18 
एतद् दृष्टं भविष्ये हि रुरोरुत्तमतेजस:।
आयुषोऽतिप्रवृद्धस्य भार्यार्थेऽर्धमलुप्यत॥ १७॥
तत इष्टेऽहनि तयो: पितरौ चक्रतुर्मुदा।
विवाहं तौ च रेमाते परस्परहितैषिणौ॥ १८॥
 
 
अनुवाद
महातेजस्वी रुरु के भाग्य में भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनकी आयु बहुत बढ़ गई थी। जब उन्होंने अपनी पत्नी के लिए अपना आधा जीवन समर्पित कर दिया, तब दोनों के पिताओं ने प्रसन्नतापूर्वक निश्चित तिथि पर उनका विवाह कर दिया। दोनों दम्पति एक-दूसरे के शुभचिंतक बन गए और सुखपूर्वक रहने लगे। 17-18।
 
Such a thing was seen in the fate of the great and brilliant Ruru. His age had increased a lot. When he gave half his life for his wife, then both their fathers happily got them married on the fixed date. Both the couples became well wishers of each other and started living happily. 17-18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)