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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 9: रुरुकी आधी आयुसे प्रमद्वराका जीवित होना, रुरुके साथ उसका विवाह, रुरुका सर्पोंको मारनेका निश्चय तथा रुरु-डुण्डुभ-संवाद
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श्लोक 15
श्लोक
1.9.15
धर्मराज उवाच
प्रमद्वरां रुरोर्भार्यां देवदूत यदीच्छसि।
उत्तिष्ठत्वायुषोऽर्धेन रुरोरेव समन्विता॥ १५॥
अनुवाद
धर्मराज बोले - देवदूत! यदि तुम रुरुकी की पत्नी प्रमद्वारा को पुनर्जीवित करना चाहते हो तो उसे रुरुकी के अर्धांग से मिलकर पुनः जीवित होना होगा। 15.
Dharamraj said - Angel! If you want to revive Ruruki's wife Pramdwara then she should unite with Ruruki's half life and come back to life. 15.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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