Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.89.7: बहुत सारा धन पाकर कभी भी अति प्रसन्न न हों, वेदों का अध्ययन करें, किन्तु अहंकार न करें। इस जीव जगत में नाना प्रकार के स्वभाव वाले अनेक प्राणी हैं, वे सभी प्रारब्ध के अधीन हैं, अतः धन आदि के लिए किए गए उनके सभी प्रयास और अधिकार व्यर्थ हो जाते हैं। अतः धैर्यवान व्यक्ति को अपनी बुद्धि से यह जानना चाहिए कि 'प्रारब्ध बलवान है' और चाहे जो भी दुःख या सुख मिले, उसमें कोई दुर्गुण नहीं मिलना चाहिए। 7॥ | mahabharat अध्याय 1.89: ययाति और अष्टकका संवाद । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बहुत सारा धन पाकर कभी भी अति प्रसन्न न हों, वेदों का अध्ययन करें, किन्तु अहंकार न करें। इस जीव जगत में नाना प्रकार के स्वभाव वाले अनेक प्राणी हैं, वे सभी प्रारब्ध के अधीन हैं, अतः धन आदि के लिए किए गए उनके सभी प्रयास और अधिकार व्यर्थ हो जाते हैं। अतः धैर्यवान व्यक्ति को अपनी बुद्धि से यह जानना चाहिए कि 'प्रारब्ध बलवान है' और चाहे जो भी दुःख या सुख मिले, उसमें कोई दुर्गुण नहीं मिलना चाहिए। 7॥
Never be overjoyed after getting great wealth, study the Vedas, but do not become egoistic. There are many creatures in this living world with different natures, all of them are under destiny, hence all their efforts and rights made for wealth etc. become useless. Therefore, a patient person should know from his wisdom that 'Destiny is strong' and whatever sorrow or happiness he may get, he should not get any vices in it. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥