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mahabharat 1.89.4: ययाति बोले - पाप पुण्य कर्मों का नाश करने वाला कहा गया है, यह नरक की ओर ले जाता है और अभिमानी पुरुषों में ही देखा जाता है। सज्जन पुरुष दुष्ट पुरुषों के बुरे आचरण का अनुसरण नहीं करते। पूर्वकाल के साधु पुरुष भी उन सज्जन पुरुषों के समान ही आचरण करते थे॥4॥   |   mahabharat अध्याय 1.89: ययाति और अष्टकका संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 89: ययाति और अष्टकका संवाद  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.89.4 
ययातिरुवाच
प्रतिकूलं कर्मणां पापमाहु-
स्तद् वर्ततेऽप्रवणे पापलोक्यम्।
सन्तोऽसतां नानुवर्तन्ति चैतद्
यथा चैषामनुकूलास्तथाऽऽसन्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले - पाप पुण्य कर्मों का नाश करने वाला कहा गया है, यह नरक की ओर ले जाता है और अभिमानी पुरुषों में ही देखा जाता है। सज्जन पुरुष दुष्ट पुरुषों के बुरे आचरण का अनुसरण नहीं करते। पूर्वकाल के साधु पुरुष भी उन सज्जन पुरुषों के समान ही आचरण करते थे॥4॥
 
Yayati said - Sin is said to be the destroyer of good deeds, it leads to hell and it is seen only in arrogant men. The good men do not follow the bad behaviour of the wicked men. The saintly men of earlier times also used to behave in the same manner as those good men.॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)