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mahabharat 1.89.23: तब देवताओं ने मुझे आपकी यज्ञभूमि का स्थान दिखाया। यह देखकर मैं तुरन्त यहाँ पहुँच गया हूँ। यज्ञ की आहुतियों की सुगंध का अनुभव करके तथा यज्ञभूमि का परिचय देने वाले धूम्र को देखकर मुझे महान सुख और शान्ति मिली है॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 1.89: ययाति और अष्टकका संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 89: ययाति और अष्टकका संवाद  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.89.23 
तैराख्याता भवतां यज्ञभूमि:
समीक्ष्य चेमां त्वरितमुपागतोऽस्मि।
हविर्गन्धं देशिकं यज्ञभूमे-
र्धूमापाङ्गं प्रतिगृह्य प्रतीत:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तब देवताओं ने मुझे आपकी यज्ञभूमि का स्थान दिखाया। यह देखकर मैं तुरन्त यहाँ पहुँच गया हूँ। यज्ञ की आहुतियों की सुगंध का अनुभव करके तथा यज्ञभूमि का परिचय देने वाले धूम्र को देखकर मुझे महान सुख और शान्ति मिली है॥ 23॥
 
Then the gods showed me the place of your sacrificial ground. Seeing this I have reached here immediately. I have got great happiness and consolation by experiencing the fragrance of the sacrificial offerings and observing the smoke that introduces the sacrificial ground.॥ 23॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि उत्तरयायाते एकोननवतितमोऽध्याय:॥ ८९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें उत्तरयायातविषयक नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८९॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके १श्लोक मिलाकर कुल २४ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)