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mahabharat 1.89.19: इस प्रकार मैं दस लाख वर्षों तक नन्दनवन में रहा, इच्छानुसार रूप धारण करता रहा और अप्सराओं के साथ क्रीड़ा करता रहा। वहाँ मैंने पवित्र सुगन्ध वाले, मनोहर रूप वाले, पुष्पों से लदे हुए वृक्ष देखे॥19॥   |   mahabharat अध्याय 1.89: ययाति और अष्टकका संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 89: ययाति और अष्टकका संवाद  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.89.19 
तथावसं नन्दने कामरूपी
संवत्सराणामयुतं शतानाम्।
सहाप्सरोभिर्विहरन् पुण्यगन्धान्
पश्यन् नगान् पुष्पितांश्चारुरूपान्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैं दस लाख वर्षों तक नन्दनवन में रहा, इच्छानुसार रूप धारण करता रहा और अप्सराओं के साथ क्रीड़ा करता रहा। वहाँ मैंने पवित्र सुगन्ध वाले, मनोहर रूप वाले, पुष्पों से लदे हुए वृक्ष देखे॥19॥
 
In this manner I stayed in Nandanvana for ten lakh years, taking whatever form I wished and playing with the Apsaras. There I saw trees with sacred fragrance and lovely appearance, which were laden with flowers.॥19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)