Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.89.15: ययाति बोले - अष्टक! पहले मैं सम्पूर्ण लोकों में प्रसिद्ध चक्रवर्ती राजा था। तत्पश्चात् मैंने अपने पुण्यकर्मों से बड़े-बड़े लोकों को जीतकर उनमें एक हजार वर्षों तक निवास किया। तत्पश्चात् मैं उनसे भी श्रेष्ठ लोक में पहुँचा॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 1.89: ययाति और अष्टकका संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 89: ययाति और अष्टकका संवाद  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.89.15 
ययातिरुवाच
राजाहमासमिह सार्वभौम-
स्ततो लोकान् महतश्चाजयं वै।
तत्रावसं वर्षसहस्रमात्रं
ततो लोकं परमस्म्यभ्युपेत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले - अष्टक! पहले मैं सम्पूर्ण लोकों में प्रसिद्ध चक्रवर्ती राजा था। तत्पश्चात् मैंने अपने पुण्यकर्मों से बड़े-बड़े लोकों को जीतकर उनमें एक हजार वर्षों तक निवास किया। तत्पश्चात् मैं उनसे भी श्रेष्ठ लोक में पहुँचा॥ 15॥
 
Yayati said - Ashtak! Earlier I was a famous Chakravarti King in the whole world. Thereafter by good deeds I conquered the big worlds and lived in them for a thousand years. After this I reached the highest world even from them.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)