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mahabharat 1.89.14: अष्टक बोले- महाराज! आप मुझे उन सभी प्रमुख लोकों का विस्तृत वर्णन दीजिए, जहाँ आपने दीर्घकाल तक रहकर सुख भोगा था। राजन्! आप महात्माओं के समान धर्म का उपदेश कर रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.89: ययाति और अष्टकका संवाद   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 89: ययाति और अष्टकका संवाद  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.89.14 
अष्टक उवाच
ये ये लोका: पार्थिवेन्द्र प्रधाना-
स्त्वया भुक्ता यं च कालं यथावत् ।
तान् मे राजन् ब्रूहि सर्वान् यथावत्
क्षेत्रज्ञवद् भाषसे त्वं हि धर्मान्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अष्टक बोले- महाराज! आप मुझे उन सभी प्रमुख लोकों का विस्तृत वर्णन दीजिए, जहाँ आपने दीर्घकाल तक रहकर सुख भोगा था। राजन्! आप महात्माओं के समान धर्म का उपदेश कर रहे हैं।
 
Ashtak said— Maharaj! Give me a detailed description of all the major worlds where you lived and enjoyed the pleasures there for a long time. King! You are preaching the religions like a great soul. 14.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)