Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.88.2: ययाति बोले - इन्द्र! मैं देवताओं, मनुष्यों, गन्धर्वों और ऋषियों में किसी को भी ऐसा नहीं देखता जो तपस्या में मेरी बराबरी कर सके॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.88: ययातिका स्वर्गसे पतन और अष्टकका उनसे प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 88: ययातिका स्वर्गसे पतन और अष्टकका उनसे प्रश्न करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.88.2 
ययातिरुवाच
नाहं देवमनुष्येषु गन्धर्वेषु महर्षिषु।
आत्मनस्तपसा तुल्यं कंचित् पश्यामि वासव॥ २॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले - इन्द्र! मैं देवताओं, मनुष्यों, गन्धर्वों और ऋषियों में किसी को भी ऐसा नहीं देखता जो तपस्या में मेरी बराबरी कर सके॥ 2॥
 
Yayati said - Indra! I do not see anyone among the gods, humans, Gandharvas and sages who can equal me in penance.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)