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mahabharat 1.87.d1-d5h: देवेन्द्र! (इसके बाद मैंने आदेश दिया कि) मनुष्य को दीन, कठोर और क्रोधी नहीं होना चाहिए। कहीं भी दुष्टता, द्वेष या शत्रुता नहीं होनी चाहिए। बुद्धिमान व्यक्ति को माता-पिता, विद्वानों, तपस्वियों और क्षमाशील लोगों का कभी अपमान नहीं करना चाहिए। बलवान व्यक्ति सदैव क्षमा करता है। बलहीन व्यक्ति सदैव क्रोध करता है। दुष्ट व्यक्ति साधु पुरुष से और दुर्बल व्यक्ति बलवान से घृणा करता है। कुरूप व्यक्ति सुंदर से, दरिद्र धनवान से, आलसी और अधार्मिक से घृणा करता है। इसी प्रकार गुणहीन व्यक्ति गुणवान व्यक्ति से ईर्ष्या करता है। इन्द्र! यह एक कली लक्षण है।   |   mahabharat अध्याय 1.87: इन्द्रके पूछनेपर ययातिका अपने पुत्र पूरुको दिये हुए उपदेशकी चर्चा करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 87: इन्द्रके पूछनेपर ययातिका अपने पुत्र पूरुको दिये हुए उपदेशकी चर्चा करना  »  श्लोक d1-d5h
 
 
श्लोक  1.87.d1-d5h 
(न च कुर्यान्नरो दैन्यं शाठॺं क्रोधं तथैव च।
जैह्मॺं च मत्सरं वैरं सर्वत्रैव न कारयेत्॥
मातरं पितरं चैव विद्वांसं च तपोधनम्।
क्षमावन्तं च देवेन्द्र नावमन्येत बुद्धिमान्॥
शक्तस्तु क्षमते नित्यमशक्त: क्रुध्यते नर:।
दुर्जन: सुजनं द्वेष्टि दुर्बलो बलवत्तरम्॥
रूपवन्तमरूपी च धनवन्तं च निर्धन:।
अकर्मी कर्मिणं द्वेष्टि धार्मिकं च न धार्मिक:॥
निर्गुणो गुणवन्तं च शक्रैतत् कलिलक्षणम्।)
 
 
अनुवाद
देवेन्द्र! (इसके बाद मैंने आदेश दिया कि) मनुष्य को दीन, कठोर और क्रोधी नहीं होना चाहिए। कहीं भी दुष्टता, द्वेष या शत्रुता नहीं होनी चाहिए। बुद्धिमान व्यक्ति को माता-पिता, विद्वानों, तपस्वियों और क्षमाशील लोगों का कभी अपमान नहीं करना चाहिए। बलवान व्यक्ति सदैव क्षमा करता है। बलहीन व्यक्ति सदैव क्रोध करता है। दुष्ट व्यक्ति साधु पुरुष से और दुर्बल व्यक्ति बलवान से घृणा करता है। कुरूप व्यक्ति सुंदर से, दरिद्र धनवान से, आलसी और अधार्मिक से घृणा करता है। इसी प्रकार गुणहीन व्यक्ति गुणवान व्यक्ति से ईर्ष्या करता है। इन्द्र! यह एक कली लक्षण है।
 
Devendra! (After this I ordered that) man should not be humble, harsh and angry. There should be no mischievousness, malice or enmity anywhere. An intelligent person should never insult parents, scholars, ascetics and forgiving people. A strong man always forgives. A powerless man is always angry. An evil person hates a saintly person and a weak person hates a strong person. An ugly person hates the beautiful, the poor hate the rich, the indolent and the irreligious. Similarly, a person without virtues is jealous of a virtuous person. Indra! This is a bud symptom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)