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mahabharat 1.87.8: क्रोध में आकर किसी के कोमल अंगों को चोट न पहुँचाएँ (ऐसा व्यवहार न करें जिससे किसी को बहुत दुःख हो)। किसी के प्रति कटु वचन न बोलें। अपने शत्रु को भी अन्याय से न दबाएँ। दूसरों को कष्ट पहुँचाने वाली या उत्तेजित करने वाली बातें न कहें; क्योंकि ऐसी बातें केवल पापी लोग ही कहते हैं॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.87: इन्द्रके पूछनेपर ययातिका अपने पुत्र पूरुको दिये हुए उपदेशकी चर्चा करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 87: इन्द्रके पूछनेपर ययातिका अपने पुत्र पूरुको दिये हुए उपदेशकी चर्चा करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.87.8 
नारुन्तुद: स्यान्न नृशंसवादी
न हीनत: परमभ्याददीत।
ययास्य वाचा पर उद्विजेत
न तां वदेदुषतीं पापलोक्याम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
क्रोध में आकर किसी के कोमल अंगों को चोट न पहुँचाएँ (ऐसा व्यवहार न करें जिससे किसी को बहुत दुःख हो)। किसी के प्रति कटु वचन न बोलें। अपने शत्रु को भी अन्याय से न दबाएँ। दूसरों को कष्ट पहुँचाने वाली या उत्तेजित करने वाली बातें न कहें; क्योंकि ऐसी बातें केवल पापी लोग ही कहते हैं॥8॥
 
Do not hurt anyone's sensitive spots in anger (do not behave in a manner that causes deep pain to someone). Do not speak harsh words towards anyone. Do not subdue even your enemy by unjust means. Do not say such things that are irritating or that agitate others; because only sinful people say such things.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)