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mahabharat 1.87.2: ऐसा सुना जाता है कि पुण्यात्मा और संयमी राजा ययाति स्वर्ग और ब्रह्मा के स्वर्गलोक में विचरण करते हुए बहुत समय तक वहाँ रहे॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.87: इन्द्रके पूछनेपर ययातिका अपने पुत्र पूरुको दिये हुए उपदेशकी चर्चा करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 87: इन्द्रके पूछनेपर ययातिका अपने पुत्र पूरुको दिये हुए उपदेशकी चर्चा करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.87.2 
देवलोकं ब्रह्मलोकं संचरन् पुण्यकृद् वशी।
अवसत् पृथिवीपालो दीर्घकालमिति श्रुति:॥ २॥
 
 
अनुवाद
ऐसा सुना जाता है कि पुण्यात्मा और संयमी राजा ययाति स्वर्ग और ब्रह्मा के स्वर्गलोक में विचरण करते हुए बहुत समय तक वहाँ रहे॥ 2॥
 
It is heard that the virtuous and self-controlled king Yayati roamed about in the heavens and the heavens of Brahma and stayed there for a long time.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)