Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.87.13: इसलिए कभी कठोर वचन न बोलें। सदैव मधुर और सुखदायक वचन बोलें। पूजनीय पुरुषों का पूजन (सम्मान) करें। दूसरों को दान दें और स्वयं कभी किसी से कुछ न मांगें॥13॥ | mahabharat अध्याय 1.87: इन्द्रके पूछनेपर ययातिका अपने पुत्र पूरुको दिये हुए उपदेशकी चर्चा करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मात् सान्त्वं सदा वाच्यं न वाच्यं परुषं क्वचित्।
पूज्यान् सम्पूजयेद् दद्यान्न च याचेत् कदाचन॥ १३॥
अनुवाद
इसलिए कभी कठोर वचन न बोलें। सदैव मधुर और सुखदायक वचन बोलें। पूजनीय पुरुषों का पूजन (सम्मान) करें। दूसरों को दान दें और स्वयं कभी किसी से कुछ न मांगें॥13॥
Therefore never speak harsh words. Always speak sweet and soothing words. Worship (respect) the respectable men. Give charity to others and never ask for anything from anyone yourself.॥ 13॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि उत्तरयायाते सप्ताशीतितमोऽध्याय:॥ ८७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें उत्तरयायातविषयक सत्तासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८७॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४ १/२ श्लोक मिलाकर कुल १७ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥