श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 86: वनमें राजा ययातिकी तपस्या और उन्हें स्वर्गलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  1.86.3-4 
स गत: स्वर्निवासं तं निवसन् मुदित: सुखी।
कालेन चातिमहता पुन: शक्रेण पातित:॥ ३॥
निपतन् प्रच्युत: स्वर्गादप्राप्तो मेदिनीतलम्।
स्थित आसीदन्तरिक्षे स तदेति श्रुतं मया॥ ४॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ग में जाकर वे सुखपूर्वक रहने लगे और बहुत समय के बाद इन्द्र ने उन्हें पुनः स्वर्ग से नीचे गिरा दिया। मैंने सुना है कि स्वर्ग से पृथ्वी पर गिरते समय वे भूमि पर नहीं पहुँचे, अपितु आकाश में ही स्थित हो गए॥3-4॥
 
After going to heaven, they started living happily and joyfully and after a long time, they were again thrown down from heaven by Indra. I have heard that while falling from heaven to earth, they did not reach the ground, but settled in the sky itself. ॥ 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)