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mahabharat 1.85.d1-d4h: 'पूत' नरक का नाम है। नरक को दुःख का एक रूप माना जाता है। लोग इस लोक और परलोक में पुत्र की कामना करते हैं, ताकि पूत नामक नरक से मुक्ति मिल सके। अपनी ही जाति का पुत्र देवताओं, ऋषियों और पितरों द्वारा पूजित होने का अधिकारी होता है। जो बहुतों का उपकार करता है, उसे ज्येष्ठ पुत्र कहते हैं। जो उपकारी पुत्र होता है, उसे इस लोक और परलोक में ज्येष्ठ पुत्र का भाग प्राप्त होता है। जो पुत्र उत्तम गुणों से युक्त होता है, वही श्रेष्ठ माना जाता है, दूसरा नहीं। गुणहीन पुत्र निकम्मा कहा गया है। धर्म को जानने वाला पुरुष पुत्र के कारण ही पितरों के धर्म का वर्णन करता है।   |   mahabharat अध्याय 1.85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक d1-d4h
 
 
श्लोक  1.85.d1-d4h 
(पुदिति नरकस्याख्या दु:खं हि नरकं विदु:।
पुतस्त्राणात् तत: पुत्त्रमिहेच्छन्ति परत्र च॥
आत्मन: सदृश: पुत्र: पितृदेवर्षिपूजने।
यो बहूनां गुणकर: स पुत्रो ज्येष्ठ उच्यते॥
ज्येष्ठांशभाक् स गुणकृदिह लोके परत्र च।
श्रेयान् पुत्रो गुणोपेत: स पुत्रो नेतरो वृथा॥
वदन्ति धर्मं धर्मज्ञा: पितॄणां पुत्रकारणात्।)
 
 
अनुवाद
'पूत' नरक का नाम है। नरक को दुःख का एक रूप माना जाता है। लोग इस लोक और परलोक में पुत्र की कामना करते हैं, ताकि पूत नामक नरक से मुक्ति मिल सके। अपनी ही जाति का पुत्र देवताओं, ऋषियों और पितरों द्वारा पूजित होने का अधिकारी होता है। जो बहुतों का उपकार करता है, उसे ज्येष्ठ पुत्र कहते हैं। जो उपकारी पुत्र होता है, उसे इस लोक और परलोक में ज्येष्ठ पुत्र का भाग प्राप्त होता है। जो पुत्र उत्तम गुणों से युक्त होता है, वही श्रेष्ठ माना जाता है, दूसरा नहीं। गुणहीन पुत्र निकम्मा कहा गया है। धर्म को जानने वाला पुरुष पुत्र के कारण ही पितरों के धर्म का वर्णन करता है।
 
‘Put’ is the name of hell. Hell is considered to be a form of suffering. People desire a son in this world and the next only to be saved from the hell called Put. A son of their own kind is entitled to be worshipped by gods, sages and ancestors. The one who is beneficial for many people is called the eldest son. That son who is beneficial gets the share of the eldest in this world and the next. The son who is endowed with good qualities is considered the best, not the other. A son without qualities is said to be useless. A man who knows about religion describes the religion of ancestors only because of the son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)