Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.85.35: राजा जनमेजय! जिस पुरुष में आप उत्पन्न हुए हैं, उसी से पौरव वंश की उत्पत्ति हुई है। आपको संयमपूर्वक एक हजार वर्षों तक इस राज्य पर शासन करना होगा।॥35॥ | mahabharat अध्याय 1.85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा जनमेजय! जिस पुरुष में आप उत्पन्न हुए हैं, उसी से पौरव वंश की उत्पत्ति हुई है। आपको संयमपूर्वक एक हजार वर्षों तक इस राज्य पर शासन करना होगा।॥35॥
King Janamejaya! The Paurava dynasty originated from Puruṣa in which you were born. You have to rule this kingdom for a thousand years with self-control. ॥ 35॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि सम्भवपर्वणि ययात्युपाख्याने पूर्वयायातसमाप्तौ पञ्चाशीतितमोऽध्याय:॥ ८५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत सम्भवपर्वमें ययात्युपाख्यानके प्रसंगमें पूर्वयायातसमाप्तिविषयक
पचासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८५॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३८ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥