Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.85.28-29: पुरु ने मेरा मित्र बनकर मेरी मनोकामनाएँ पूर्ण की हैं। स्वयं शुक्राचार्य ने मुझे आशीर्वाद दिया है कि ‘जो पुत्र तुम्हारा पालन करेगा, वही राजा होगा और सम्पूर्ण जगत का रक्षक होगा।’ अतः मैं आपसे विनम्र निवेदन करता हूँ कि आप पुरु को राजा के रूप में अभिषिक्त करें॥ 28-29॥ | mahabharat अध्याय 1.85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मम काम: स च कृत: पूरुणा मित्ररूपिणा।
शुक्रेण च वरो दत्त: काव्येनोशनसा स्वयम्॥ २८॥
पुत्रो यस्त्वानुवर्तेत स राजा पृथिवीपति:।
भवतोऽनुनयाम्येवं पूरू राज्येऽभिषिच्यताम्॥ २९॥
अनुवाद
पुरु ने मेरा मित्र बनकर मेरी मनोकामनाएँ पूर्ण की हैं। स्वयं शुक्राचार्य ने मुझे आशीर्वाद दिया है कि ‘जो पुत्र तुम्हारा पालन करेगा, वही राजा होगा और सम्पूर्ण जगत का रक्षक होगा।’ अतः मैं आपसे विनम्र निवेदन करता हूँ कि आप पुरु को राजा के रूप में अभिषिक्त करें॥ 28-29॥
Puru has fulfilled my desires by becoming my friend. Shukracharya himself has blessed me that 'the son who follows you will be the king and the protector of the whole world'. Therefore, I humbly request you to anoint Puru as the king.॥ 28-29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥