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mahabharat 1.85.26: यदु ने मेरी उपेक्षा की है; तुर्वसु, द्रुह्यु और अनु ने भी मेरा बड़ा तिरस्कार किया है।   |   mahabharat अध्याय 1.85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.85.26 
यदुनाहमवज्ञातस्तथा तुर्वसुनापि च।
द्रुह्युना चानुना चैव मय्यवज्ञा कृता भृशम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
यदु ने मेरी उपेक्षा की है; तुर्वसु, द्रुह्यु और अनु ने भी मेरा बड़ा तिरस्कार किया है।
 
Yadu has ignored me; Turvasu, Druhyu and Anu have also treated me with great disdain. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)