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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.85.25 
मातापित्रोर्वचनकृद्धित: पथ्यश्च य: सुत:।
स पुत्र: पुत्रवद् यश्च वर्तते पितृमातृषु॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जो अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करता है, उनका कल्याण चाहता है, उनकी इच्छा के अनुसार कार्य करता है तथा माता-पिता के प्रति पुत्र जैसा व्यवहार करता है, वही सच्चा पुत्र है।
 
He who obeys his parents, seeks their welfare, acts according to their wishes and behaves like a son towards his parents is truly a son. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)