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mahabharat 1.85.24: मेरे ज्येष्ठ पुत्र यदु ने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया है। जो अपने पिता के विरुद्ध है, वह सज्जनों की दृष्टि में पुत्र नहीं माना जाता।   |   mahabharat अध्याय 1.85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.85.24 
मम ज्येष्ठेन यदुना नियोगो नानुपालित:।
प्रतिकूल: पितुर्यश्च न स पुत्र: सतां मत:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
मेरे ज्येष्ठ पुत्र यदु ने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया है। जो अपने पिता के विरुद्ध है, वह सज्जनों की दृष्टि में पुत्र नहीं माना जाता।
 
My eldest son Yadu has not followed my orders. One who is against his father is not considered a son in the eyes of good men. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)