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mahabharat 1.85.20: 'प्रभु! आप शुक्राचार्य के पौत्र और देवयानी के ज्येष्ठ पुत्र यदु को छोड़कर पुरु को राज्य क्यों देते हैं?॥ 20॥   |   mahabharat अध्याय 1.85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.85.20 
कथं शुक्रस्य नप्तारं देवयान्या: सुतं प्रभो।
ज्येष्ठं यदुमतिक्रम्य राज्यं पूरो: प्रयच्छसि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
'प्रभु! आप शुक्राचार्य के पौत्र और देवयानी के ज्येष्ठ पुत्र यदु को छोड़कर पुरु को राज्य क्यों देते हैं?॥ 20॥
 
'Prabhu! Why do you give the kingdom to Puru, bypassing Yadu, who is the grandson of Shukracharya and the eldest son of Devayani?॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)