Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.85.18: वैशम्पायन कहते हैं: जनमेजय, उस समय नहुषनंदन के पुत्र राजा ययाति पुनः वृद्धावस्था में आ गये और पुरु पुनः युवा हो गये।   |   mahabharat अध्याय 1.85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.85.18 
वैशम्पायन उवाच
प्रतिपेदे जरां राजा ययातिर्नाहुषस्तदा।
यौवनं प्रतिपेदे च पूरु: स्वं पुनरात्मन:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: जनमेजय, उस समय नहुषनंदन के पुत्र राजा ययाति पुनः वृद्धावस्था में आ गये और पुरु पुनः युवा हो गये।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya, at that time King Yayati, the son of Nahushanandana, regained his old age and Puru regained his youth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)