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mahabharat 1.85.17: 'पुरो! तुम्हारा कल्याण हो, मैं प्रसन्न हूँ। अपनी जवानी वापस ले लो। इस राज्य को भी अपने अधीन कर लो; क्योंकि तुम मेरे प्रिय पुत्र हो।'॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.85.17 
पूरो प्रीतोऽस्मि भद्रं ते गृहाणेदं स्वयौवनम्।
राज्यं चेदं गृहाण त्वं त्वं हि मे प्रियकृत् सुत:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'पुरो! तुम्हारा कल्याण हो, मैं प्रसन्न हूँ। अपनी जवानी वापस ले लो। इस राज्य को भी अपने अधीन कर लो; क्योंकि तुम मेरे प्रिय पुत्र हो।'॥17॥
 
'Puro! May you be blessed, I am pleased. Take back your youth. Also take this kingdom under your control; because you are my beloved son.'॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)