Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.85.11: हे शत्रुदमन (शत्रु) के पुत्र! मैंने अपनी रुचि, उत्साह और समय के अनुसार तुम्हारी युवावस्था के द्वारा सांसारिक सुखों का भोग किया है।॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 85: राजा ययातिका विषय-सेवन और वैराग्य तथा पूरुका राज्याभिषेक करके वनमें जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.85.11 
यथाकामं यथोत्साहं यथाकालमरिंदम।
सेविता विषया: पुत्र यौवनेन मया तव॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुदमन (शत्रु) के पुत्र! मैंने अपनी रुचि, उत्साह और समय के अनुसार तुम्हारी युवावस्था के द्वारा सांसारिक सुखों का भोग किया है।॥11॥
 
'O son of Shatrudaman (enemy), I have enjoyed the worldly pleasures through your youth according to my interest, enthusiasm and time. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)