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mahabharat 1.84.9: ययाति ने कहा, "महाराज! यद्यपि तुम मेरे हृदय से उत्पन्न हुए हो (मेरे पुत्र), फिर भी तुमने मुझे अपनी युवावस्था नहीं दी; इसलिए तुम्हारी संतान राज्य का उत्तराधिकारी नहीं होगी।"   |   mahabharat अध्याय 1.84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.84.9 
ययातिरुवाच
यत् त्वं मे हृदयाज्जातो वय: स्वं न प्रयच्छसि।
तस्मादराज्यभाक् तात प्रजा तव भविष्यति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
ययाति ने कहा, "महाराज! यद्यपि तुम मेरे हृदय से उत्पन्न हुए हो (मेरे पुत्र), फिर भी तुमने मुझे अपनी युवावस्था नहीं दी; इसलिए तुम्हारी संतान राज्य का उत्तराधिकारी नहीं होगी।"
 
Yayati said, "Sir, even though you are born from my heart (my son), you do not give me your youth; therefore your progeny will not inherit the kingdom."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)