श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.84.7 
अशक्त: कार्यकरणे परिभूत: स यौवतै:।
सहोपजीविभिश्चैव तां जरां नाभिकामये॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वृद्धावस्था में काम करने की शक्ति नहीं रहती; जीविका कमाने वाली युवतियाँ और नौकर भी उससे घृणा करते हैं; इसलिए मैं बूढ़ा होना नहीं चाहता ॥7॥
 
In old age one does not have the strength to work; even young women and servants who earn their livelihood despise one; therefore, I do not wish to grow old. ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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