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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना
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श्लोक 5
श्लोक
1.84.5
यदुुरुवाच
जरायां बहवो दोषा: पानभोजनकारिता:।
तस्माज्जरां न ते राजन् ग्रहीष्य इति मे मति:॥ ५॥
अनुवाद
यदु ने कहा, 'हे राजन! वृद्धावस्था में खाने-पीने से अनेक दोष उत्पन्न होते हैं; अतः मैं आपका वृद्धावस्था ग्रहण न करने का निश्चय करता हूँ।' ॥5॥
Yadu said, 'O King! In old age many defects are caused by eating and drinking; therefore I am determined not to take your old age.' ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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