श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.84.32 
जरयाहं प्रतिच्छन्नो वयोरूपधरस्तव।
यौवनं भवते दत्त्वा चरिष्यामि यथाऽऽत्थ माम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
'मैं आपकी आयु और रूप धारण करूँगा, बुढ़ापे से आच्छादित होकर, और आपको युवावत् ​​प्रदान करके, आप जो भी आज्ञा देंगे, उसका पालन करूँगा।'॥32॥
 
'I will assume your age and form, covered with old age, and giving you youth, I will carry out whatever orders you give me.'॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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