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mahabharat 1.84.31: हे राजन! मैं वृद्धावस्था सहित आपके दोषों को स्वीकार करूँगी। आप मेरी युवावस्था लेकर इच्छानुसार भोग-विलास के विषय भोग लीजिए।   |   mahabharat अध्याय 1.84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.84.31 
प्रतिपत्स्यामि ते राजन् पाप्मानं जरया सह।
गृहाण यौवनं मत्तश्चर कामान् यथेप्सितान्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैं वृद्धावस्था सहित आपके दोषों को स्वीकार करूँगी। आप मेरी युवावस्था लेकर इच्छानुसार भोग-विलास के विषय भोग लीजिए।
 
‘O King! I will accept your faults along with old age. You take my youth and enjoy the objects of pleasure as per your wish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)