वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त: प्रत्युवाच पूरु: पितरमञ्जसा।
यथाऽऽत्थ मां महाराज तत् करिष्यामि ते वच:॥ ३०॥
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जब ययाति ने ऐसा कहा, तो पुरु ने विनम्रतापूर्वक अपने पिता से कहा - 'महाराज! आप मुझे जो कुछ करने की आज्ञा दे रहे हैं, मैं आपकी उस आज्ञा का पालन करूँगा।'
Vaishmpayana says - When Yayati said this, Puru humbly told his father - 'Maharaj! Whatever you are ordering me to do, I will follow that command of yours.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥