श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  1.84.3-4 
त्वं यदो प्रतिपद्यस्व पाप्मानं जरया सह।
यौवनेन त्वदीयेन चरेयं विषयानहम्॥ ३॥
पूर्णे वर्षसहस्रे तु पुनस्ते यौवनं त्वहम्।
दत्त्वा स्वं प्रतिपत्स्यामि पाप्मानं जरया सह॥ ४॥
 
 
अनुवाद
यदो! तुम वृद्धावस्था सहित मेरे दोष ले लो और मैं तुम्हारी युवावस्था सहित भोगों का भोग करूंगा। एक हजार वर्ष पूरे होने पर मैं तुम्हें तुम्हारी युवावस्था पुनः दे दूंगा और वृद्धावस्था सहित अपने दोष ले लूंगा॥ 3-4॥
 
Yado! You take my faults along with old age and I will enjoy the sensual pleasures with your youth. After completion of one thousand years, I will give you your youth again and take back my faults along with old age.॥ 3-4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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