श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.84.27 
ययातिरुवाच
पूरो त्वं मे प्रिय: पुत्रस्त्वं वरीयान् भविष्यसि।
जरा वली च मां तात पलितानि च पर्यगु:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
ययाति ने [पुरु से] कहा - पुरु! तुम मेरे प्रिय पुत्र हो। तुम गुणों में श्रेष्ठ होगे। हे प्रिय! मुझे बुढ़ापा घेर रहा है; सारे अंग झुर्रीदार हो गए हैं और सिर के बाल सफेद हो गए हैं। मुझमें बुढ़ापे के ये सभी लक्षण एक साथ आ गए हैं।
 
Yayati said [to Puru] - Puru! You are my beloved son. You will be superior in virtues. O dear! Old age has surrounded me; all the limbs have become wrinkled and the hair on my head has turned white. I have got all these signs of old age at the same time.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas