श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.84.24 
अनुरुवाच
जीर्ण: शिशुवदादत्तेऽकालेऽन्नमशुचिर्यथा।
न जुहोति च कालेऽग्निं तां जरां नाभिकामये॥ २४॥
 
 
अनुवाद
अनु ने कहा - पिताजी! वृद्ध पुरुष बालकों की तरह अनुचित समय पर भोजन करता है, अशुद्ध रहता है और उचित समय पर अग्निहोत्र नहीं करता। अतः मैं ऐसी वृद्धावस्था में नहीं रहना चाहता॥ 24॥
 
Anu said - Father! An old man eats like a child at inappropriate times, remains impure and does not perform Agnihotra (fire sacrifice) at appropriate times. Therefore, I do not want to live in such old age.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)