श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.84.20 
ययातिरुवाच
यत् त्वं मे हृदयाज्जातो वय: स्वं न प्रयच्छसि।
तस्माद् द्रुह्यो प्रिय: कामो न ते सम्पत्स्यते क्वचित्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले - द्रुह्यो! मेरे हृदय से उत्पन्न होने पर भी तुम मुझे अपना यौवन नहीं दे रहे हो; अतः तुम्हारी यह अभिलाषा कभी पूरी नहीं होगी।
 
Yayati said - Druhyo! Even though you were born from my heart, you are not giving me your youth; therefore your cherished desire will never be fulfilled.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)