श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.84.2 
ययातिरुवाच
जरा वली च मां तात पलितानि च पर्यगु:।
काव्यस्योशनस: शापान्न च तृप्तोऽस्मि यौवने॥ २॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले, 'हे प्रिये! कविपुत्र शुक्राचार्य के शाप से मुझे वृद्धावस्था ने घेर लिया है; मेरा शरीर झुर्रियोंयुक्त हो गया है और बाल सफेद हो गए हैं; किन्तु मैं अभी भी युवावस्था के सुखों से तृप्त नहीं हुआ हूँ।
 
Yayati said, 'My dear! Due to the curse of Shukrachary, the son of the poet, old age has surrounded me; my body has become wrinkled and my hair has turned white; but I am still not satiated with the pleasures of youth.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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