श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.84.19 
द्रुह्युरुवाच
न गजं न रथं नाश्वं जीर्णो भुङ्‍क्ते न च स्त्रियम्।
वाक्सङ्गश्चास्य भवति तां जरां नाभिकामये॥ १९॥
 
 
अनुवाद
द्रुह्यु बोले - पिताश्री ! बूढ़ा मनुष्य हाथी, घोड़े या रथ पर नहीं चढ़ सकता; वह स्त्री का भोग भी नहीं कर सकता; उसकी वाणी भी लड़खड़ाने लगती है; इसलिए मैं बूढ़ा होना नहीं चाहता ॥19॥
 
Druhyu said - Father! An old man cannot ride an elephant, horse or chariot; he cannot even enjoy a woman. His speech also starts faltering; hence I do not want to grow old.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)