द्रुह्युरुवाच
न गजं न रथं नाश्वं जीर्णो भुङ्क्ते न च स्त्रियम्।
वाक्सङ्गश्चास्य भवति तां जरां नाभिकामये॥ १९॥
अनुवाद
द्रुह्यु बोले - पिताश्री ! बूढ़ा मनुष्य हाथी, घोड़े या रथ पर नहीं चढ़ सकता; वह स्त्री का भोग भी नहीं कर सकता; उसकी वाणी भी लड़खड़ाने लगती है; इसलिए मैं बूढ़ा होना नहीं चाहता ॥19॥
Druhyu said - Father! An old man cannot ride an elephant, horse or chariot; he cannot even enjoy a woman. His speech also starts faltering; hence I do not want to grow old.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥