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mahabharat 1.84.17: ययाति बोले, "द्रुह्यो! यह तेज और सौंदर्य का नाश करने वाली वृद्धावस्था ले लो और मुझे एक हजार वर्ष की अपनी जवानी दे दो।"   |   mahabharat अध्याय 1.84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.84.17 
ययातिरुवाच
द्रुह्यो त्वं प्रतिपद्यस्व वर्णरूपविनाशिनीम्।
जरां वर्षसहस्रं मे यौवनं स्वं ददस्व च॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले, "द्रुह्यो! यह तेज और सौंदर्य का नाश करने वाली वृद्धावस्था ले लो और मुझे एक हजार वर्ष की अपनी जवानी दे दो।"
 
Yayati said, "Druhyo! Take this old age which destroys radiance and beauty and give me your youth for a thousand years."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)