श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.84.16 
वैशम्पायन उवाच
एवं स तुर्वसुं शप्त्वा ययाति: सुतमात्मन:।
शर्मिष्ठाया: सुतं द्रुह्युमिदं वचनमब्रवीत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! इस प्रकार राजा ययातिन ने अपने पुत्र तुर्वसु को शाप दिया और यह बात शर्मिष्ठा के पुत्र द्रुह्यु से कही। 16॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! King Yayatina thus cursed his son Turvasu and said this to Druhyu, son of Sharmistha. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)